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तेरे कर्मों का प्रतिफल है

VIJAY KUMAR VERMA 1:41 AM
तेरे कर्मों का प्रतिफल है,  पंखों का बिछौना है । प्रकृति के समक्ष मानव,  तू आज भी बौना है।।  लालच में पूर्णता  की , क्या क्य...Read More
तेरे कर्मों का प्रतिफल है तेरे कर्मों का प्रतिफल है Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 1:41 AM Rating: 5

सॅभल कहाँ पाते।

VIJAY KUMAR VERMA 6:07 AM
बिखर ही जाना था, सॅभल कहाँ पाते। वो जिस तरह से बदला, बदल कहाँ पाते।। कुछ ऐसी बात थी जिसने, मुझे झुकने न दिया; जमीर बेंच के वैसे भी, ...Read More
सॅभल कहाँ पाते। सॅभल कहाँ पाते। Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 6:07 AM Rating: 5
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