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उड़ जाना होता है


साथ परिन्दों का कब, तक?
छुट जाना होता है।
पंख खुले तो फिर इक दिन,
उड़ जाना होता है।।
खुशी के पल जो खुशबू,
बनकर ,महके जीवन मे,
उन्हीं पलों का मन मे फिर,
चुभ जाना होता है।
हर पल ये कोशिश कि,
उसकी याद ना आ जाये;
लेकिन हर पल मन का उस से,
जुड़ जाना होता है।
साथ पथिक का तभी तलक,
जब तक राहों का साथ;
राहों को भी कभी कभी,
मुड़ जाना होता है।
पद,पैसा, सम्मान सब ,
मगर आँखों मे बेचैनी,
खुद के भीतर खुद से ही,
लड़ जाना होता है।
-विजय वर्मा
27-06-2019
उड़ जाना होता है उड़ जाना होता है Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 9:19 AM Rating: 5

14 comments:

  1. सुंदर सारगर्भित रचना।

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना 10 जुलाई 2019 के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  3. बेहतरीन लेखन ...आनन्द आ गया इन लाइनों में । बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय ।

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  4. बहुत सुंदर गहरे भाव लिये उत्तम रचना।

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  5. वाह क्या कहने बहुत खूब..सुंदर सृजन👌

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  6. बहुत सुंदर और सारगर्भित प्रस्तुति।

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  7. लाजवाब सृजन
    वाह!!!

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  8. साथ पथिक का तभी तलक,
    जब तक राहों का साथ;
    राहों को भी कभी कभी,
    मुड़ जाना होता है।... जीवन का यही दर्शन है। सुंदर अभिव्यक्ति।

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  9. बहुत खूब ... जीवन का सार लिखा है इन धब्दों में ...
    लाजवाब भावपूर्ण ...

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  10. अंतिम पन्तियाँ बहुत अच्छी लगी...सुंदर प्रस्तुती

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  11. बेहतरीन प्रस्तुति

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