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भाव मन के

मन के भाव
स्मृतियों के पुल से होकर,
कोई हँस कर कोई रो कर।
मन मे ना जाने कितने ही,
सुख दुख के टीसो को बो कर।
कोई निपट अकेला चलता,
कोई चलता जग का हो कर।
कोई सिर का ताज हो गया,
कोई चलता बन कर  जोकर।
कोई पा कर भी उदास है,
कोई खुश है खुद को खो कर।

भाव कई जो उधर गये,
फिर ना जाने किधर गये।
कुछ लावारिस सा भटख रहे,
कुछ आँखों मे सँवर गये।
कुछ अब भी वैसे के वैसे,
कुछ राहों मे बिखर गये।
कई उपेक्षित,पड़े आँख मे,
कई ख्वाब बन निखर गये।

भाव कई जो उधर से आये,
अपने साथ स्वपन भी लाये।
कोई चहक रहा अपनो मे,
कोई खड़ा है मुह लटकाये।
कोई आँसू से भीगा है,
कोई खुद से ही शरमाये।
कोई बना दर्द का पुतला,
कोई मन ही मन मुस्काये।
किसी के मुख से शब्द न निकले,
कोई आँधी सा बतियाये।

कुछ छोड़ गये मीठी यादें।
कुछ दर्द,टीस और फरियादें।।

कुछ बन्धन जग से और कस गये।
बन मधुर याद आँखो मे बस गये।।
                   -विजय वर्मा
               08-03-2017
              बस्ती ,उ.प्र.
भाव मन के भाव मन के Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 9:06 AM Rating: 5

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