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फिर से-45

VIJAY KUMAR VERMA 7:19 PM
शेर है तूँ, सोयेगा कब तक, निकल माँद से दहाड़ फिर से। हालातों का कब तक रोना, हालातों को  पछाड़ फिर से। दुर्बलता तो भ्रम है मन का, मन सशक्...Read More
फिर से-45 फिर से-45 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 7:19 PM Rating: 5

फिर से-44

VIJAY KUMAR VERMA 7:18 PM
अंतस मे कैसे उग आया, प्रणय भाव का द्वीप फिर से। कुछ तो कहना चाहें लहरें, आ आ कर के समीप फिर से।। दूर तलक ना कोई किनारा, फिर भी लगे ज्य...Read More
फिर से-44 फिर से-44 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 7:18 PM Rating: 5

फिर से-43

VIJAY KUMAR VERMA 7:17 PM
दूर तलक बस दिखायी देती, उदास मन की कतार फिर से। कीमत लग रही इन्सानो की, शबाब पर है बाजार फिर से। सभी तरह की सजी  दुकाने, टंगी खूटियों ...Read More
फिर से-43 फिर से-43 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 7:17 PM Rating: 5

भाव मन के

VIJAY KUMAR VERMA 9:06 AM
मन के भाव स्मृतियों के पुल से होकर, कोई हँस कर कोई रो कर। मन मे ना जाने कितने ही, सुख दुख के टीसो को बो कर। कोई निपट अकेला चलता, कोई ...Read More
भाव मन के भाव मन के Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 9:06 AM Rating: 5

फिर से-42

VIJAY KUMAR VERMA 4:49 PM
समय नही अनुकूल हो तो भी, कर्म को बना के ढाल फिर से। अगर पसीना उगे बदन  पर, उसे मोतियों मे ढाल फिर से।। जब मन करने पर आ जाये, बाधा रज क...Read More
फिर से-42 फिर से-42 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 4:49 PM Rating: 5
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