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फिर से

VIJAY KUMAR VERMA 7:44 PM
जुनून जूझने का मुश्किलों से, चाहता हूँ आजमाना फिर से। फिर से दो चार हाथ हो जाये; सामने हूँ आ जमाना फिर से।। तेरी तरकीब सीख आया हूँ, नय...Read More
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फिर से

VIJAY KUMAR VERMA 6:05 PM
किस प्रिय से मिलने को आतुर, व्याकुल सी लगती धरा फिर से। इक तो बसंत ,और अंगड़ाई, कमनीय रूप धरा फिर से।। गेंदा,गुलाब,चम्पा ,टेसू, जूही,बे...Read More
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फिर से

VIJAY KUMAR VERMA 4:23 PM
ना  जाने कैसे उग     आयी, दिल के दरमियाँ दीवार फिर से। झुकती सी महसूस हो रही, उम्मीद वाली मीनार फिर से।। आँख से नींद का यूँ  रूठ जाना, ...Read More
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