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फिर से-51

VIJAY KUMAR VERMA 12:30 AM
तुम्हारी आँखों के फैसले पर, लगी हुई मन की आस फिर से। बदन नहाया हुआ अश्क से, मगर लबों पे है प्यास फिर से।। उलझन मन कु बढ़ती जाये, कभी हँ...Read More
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फिर से-50

VIJAY KUMAR VERMA 11:59 PM
नुकीले काँटों ने पहनी फिर से, भरोसे वाली लिबास फिर  से। कुछ तो अनहोनी होनी   है, बातों मे है मिठास फिर  से। कहीं झूम के सावन बरसे, याच...Read More
फिर से-50 फिर से-50 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 11:59 PM Rating: 5

फिर से -48

VIJAY KUMAR VERMA 2:13 PM
छोड़ किताबें कागज वाली, सीख समय को पढ़ना फिर से। बाधायें तो भ्रम हैं मन का, पल प्रतिपल बस बढ़ना फिर से। कर्म को,अपनी कलम बना कर, श्रम से,...Read More
फिर से -48 फिर से -48 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 2:13 PM Rating: 5

First session 46

VIJAY KUMAR VERMA 2:04 PM
यूँ ही कभी किसी मोड़ पर, जो लड़खड़ाये पैर फिर से। जो बन गये ताबीज  थे, झट हो गये सब गैर फिर से। उलझे हुए सम्बन्ध हैं सब, स्वार्थवश अनुबन्...Read More
First session 46  First session 46 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 2:04 PM Rating: 5

फिर से-45

VIJAY KUMAR VERMA 7:19 PM
शेर है तूँ, सोयेगा कब तक, निकल माँद से दहाड़ फिर से। हालातों का कब तक रोना, हालातों को  पछाड़ फिर से। दुर्बलता तो भ्रम है मन का, मन सशक्...Read More
फिर से-45 फिर से-45 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 7:19 PM Rating: 5

फिर से-44

VIJAY KUMAR VERMA 7:18 PM
अंतस मे कैसे उग आया, प्रणय भाव का द्वीप फिर से। कुछ तो कहना चाहें लहरें, आ आ कर के समीप फिर से।। दूर तलक ना कोई किनारा, फिर भी लगे ज्य...Read More
फिर से-44 फिर से-44 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 7:18 PM Rating: 5

फिर से-43

VIJAY KUMAR VERMA 7:17 PM
दूर तलक बस दिखायी देती, उदास मन की कतार फिर से। कीमत लग रही इन्सानो की, शबाब पर है बाजार फिर से। सभी तरह की सजी  दुकाने, टंगी खूटियों ...Read More
फिर से-43 फिर से-43 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 7:17 PM Rating: 5

भाव मन के

VIJAY KUMAR VERMA 9:06 AM
मन के भाव स्मृतियों के पुल से होकर, कोई हँस कर कोई रो कर। मन मे ना जाने कितने ही, सुख दुख के टीसो को बो कर। कोई निपट अकेला चलता, कोई ...Read More
भाव मन के भाव मन के Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 9:06 AM Rating: 5

फिर से-42

VIJAY KUMAR VERMA 4:49 PM
समय नही अनुकूल हो तो भी, कर्म को बना के ढाल फिर से। अगर पसीना उगे बदन  पर, उसे मोतियों मे ढाल फिर से।। जब मन करने पर आ जाये, बाधा रज क...Read More
फिर से-42 फिर से-42 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 4:49 PM Rating: 5

फिर से

VIJAY KUMAR VERMA 7:44 PM
जुनून जूझने का मुश्किलों से, चाहता हूँ आजमाना फिर से। फिर से दो चार हाथ हो जाये; सामने हूँ आ जमाना फिर से।। तेरी तरकीब सीख आया हूँ, नय...Read More
फिर से फिर से Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 7:44 PM Rating: 5

फिर से

VIJAY KUMAR VERMA 6:05 PM
किस प्रिय से मिलने को आतुर, व्याकुल सी लगती धरा फिर से। इक तो बसंत ,और अंगड़ाई, कमनीय रूप धरा फिर से।। गेंदा,गुलाब,चम्पा ,टेसू, जूही,बे...Read More
फिर से फिर से Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 6:05 PM Rating: 5

फिर से

VIJAY KUMAR VERMA 4:23 PM
ना  जाने कैसे उग     आयी, दिल के दरमियाँ दीवार फिर से। झुकती सी महसूस हो रही, उम्मीद वाली मीनार फिर से।। आँख से नींद का यूँ  रूठ जाना, ...Read More
फिर से फिर से Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 4:23 PM Rating: 5
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