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फिर से

VIJAY KUMAR VERMA 10:05 PM
न अब से सिर  उठा  पाये, कोई मन की कलह फिर से। ये साँसे फिर महक  जायें, चलो कर ले  सुलह फिर से।। न जाने कब से इन आँखो ने, सूरज को नहीँ ...Read More
फिर से फिर से Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 10:05 PM Rating: 5
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