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स्वागत नव वर्ष तुम्हारा स्वागत नव वर्ष तुम्हारा Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 4:38 AM Rating: 5

पहले कभी ना था

VIJAY KUMAR VERMA 7:53 AM
ये दिन जितना सुहाना आजकल पहले कभी ना था ये मौसम आशिकाना आजकल पहले कभी ...Read More
पहले कभी ना था पहले कभी ना था Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 7:53 AM Rating: 5

कैसा हो गया मेरा गाँव

VIJAY KUMAR VERMA 4:55 AM
कैसा हो गया मेरा गाँव सड़क के मायाजाल में गुम है प्यार की पगडंडी दिल का दरवाजा बंद किए है मतलब की कुंजी तेज धुप है गरम हवा है कहीं न दिखता ...Read More
कैसा हो गया मेरा गाँव कैसा हो गया मेरा गाँव Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 4:55 AM Rating: 5

ऐसे दीप जलाएं

VIJAY KUMAR VERMA 8:30 AM
अंतस में जो कलुष भाव है ,उसको आज मिटायें कहीं ठौर ना पाए अँधेरा ,ऐसे दीप जलाएं रूठ के बच्चे से कोई ,बैठे ना दूर खिलौना आँखों से रूठे ...Read More
ऐसे दीप जलाएं ऐसे दीप जलाएं Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 8:30 AM Rating: 5

चुनाव आ गया

VIJAY KUMAR VERMA 8:48 AM
उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न भागों में चुनाव कार्यक्रम चल रहा है ,इस सन्दर्भ में एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ ;जिसको १९९८ में लिखा था ...Read More
चुनाव आ गया चुनाव आ गया Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 8:48 AM Rating: 5

अक्सर वो बुलाना उसका

VIJAY KUMAR VERMA 7:59 AM
कभी यादो में , कभी ख्वाबों में आ जाना उसका एक हलचल सी , मचाती है , याद आना उसका धूप में जिन्दगी के , पाँव जब जलते ...Read More
अक्सर वो बुलाना उसका अक्सर वो बुलाना उसका Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 7:59 AM Rating: 5

नया इतिहास बना डालें

VIJAY KUMAR VERMA 11:40 AM
आप अगर दें साथ ,नया इतिहास बना डालें सूनी सूनी आखों में ,विश्वास जगा डालें जिसके नीचे जाति-धर्म की हवा न चलने पाए ; प्यार का ऐसा कोई ,नया ...Read More
नया इतिहास बना डालें नया इतिहास बना डालें Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 11:40 AM Rating: 5

कैसे बिसरी

VIJAY KUMAR VERMA 11:22 AM
मोरे मन की बतिया सुनके मोहे पागल समझके मत हंस री तुहका कुछ याद नहीं न सही मोरे मनमीत की ई नगरी देखब कब तक लईके घुमबो सिर पर मोरे यादन की गठ...Read More
कैसे बिसरी कैसे बिसरी Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 11:22 AM Rating: 5

चाँद रूठा रहा जाने किस बात पर

VIJAY KUMAR VERMA 9:18 AM
चाँद रूठा रहा जाने किस बात पर ; चांदनी के बिना रात रोती रही / भीगा तन भीगा मन ,भीगा सारा जहाँ ; आँखों से ऐसी ,बरसात होती रही / ऐसे...Read More
चाँद रूठा रहा जाने किस बात पर चाँद रूठा रहा जाने किस बात पर Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 9:18 AM Rating: 5

सच्चाई

VIJAY KUMAR VERMA 9:58 AM
सच्चाई को झुठलाया नही जा सकता / औपचारिकतावश हाथ मिला लेने से ही मन नही मिला करता ; जैसे किसी पौधे को कही से लाकर घर की दहलीज पर लगा देने म...Read More
सच्चाई सच्चाई Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 9:58 AM Rating: 5

उचित फैसले ले ले

VIJAY KUMAR VERMA 5:18 AM
अभी समय है कुछ उचित फैसले ले ले कहीं पर दूरियां और कहीं फासले ले ले युद्ध में प्यार की भाषा को कौन समझेगा अपने तरकश में कुछ तीर विष घुले ...Read More
उचित फैसले ले ले उचित फैसले ले ले Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 5:18 AM Rating: 5
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