Poetry, Ghazals and much more !!

कैसा हो गया मेरा गाँव


कैसा हो गया मेरा गाँव
सड़क के मायाजाल में गुम है प्यार की पगडंडी
दिल का दरवाजा बंद किए है मतलब की कुंजी
तेज धुप है गरम हवा है कहीं न दिखता छांव
कैसा हो गया मेरा गाँव
रमई का सिरदर्द यही पानी कैसे रोके
मगरू प्रधान का बहुत ख़ास उसको कैसे टोंके
चला रहे सब एक दूजे पर अपने अपने दाँव
कैसा हो गया मेरा गाँव
पक्के घर हो गए सभी इन्सान हुआ पत्थर
आपस में संबाद नहीं बाकी सब कुछ बेहतर
घायल है मखमली सतह पर जाने क्यों हर पाँव
कैसा हो गया मेरा गाँव
विजय कुमार वर्मा
कैसा हो गया मेरा गाँव कैसा हो गया मेरा गाँव Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 3:37 AM Rating: 5

1 comment:

  1. Vermaji,
    aapki pida sahi hai sabhi jagahon ka yahi bedard hal hai.Aap bilkul satik likhtey hain.aapkey posts padh kar tasalli hui ki satya bolney wale ek aur saheb miley.

    ReplyDelete

Powered by Blogger.