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कैसे बिसरी

VIJAY KUMAR VERMA 4:52 AM
मोरे मन की बतिया सुनके मोहे पागल समझके मत हंस री तुहका कुछ याद नहीं न सही मोरे मनमीत की ई नगरी देखब कब तक लईके घुमबो सिर पर मोरे यादन की गठ...Read More
कैसे बिसरी कैसे बिसरी Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 4:52 AM Rating: 5

मेरे लिए

VIJAY KUMAR VERMA 4:10 AM
तेरे रस्ते मेरे दिल की तरफ़ जो मुङ गए होते ऐ बादल बेकसी के जाने कब के उङ गए होते कदम मेरे बंधे थे साथ तेरे चल न पाये ऐ तुम्हीं मेरे ल...Read More
मेरे लिए मेरे लिए Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 4:10 AM Rating: 5

कैसा हो गया मेरा गाँव

VIJAY KUMAR VERMA 3:37 AM
कैसा हो गया मेरा गाँव सड़क के मायाजाल में गुम है प्यार की पगडंडी दिल का दरवाजा बंद किए है मतलब की कुंजी तेज धुप है गरम हवा है कहीं न दिख...Read More
कैसा हो गया मेरा गाँव कैसा हो गया मेरा गाँव Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 3:37 AM Rating: 5
VIJAY KUMAR VERMA 6:47 AM
गिरने के बाद जो खुद ही संभल सकता है, वो अपने हाथ की रेखा भी बदल सकता है हवा की चाल जिसने गौर से महसूस किया वो ज़माने से बहुत आगे निकल सकता हैRead More
Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 6:47 AM Rating: 5
VIJAY KUMAR VERMA 6:36 AM
आप का मैं ब्लॉग जगत मैं स्वागत करता हु और आशा करता हु की आप हमें विचारो से अवगत कराएँगेRead More
Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 6:36 AM Rating: 5
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