Vijay Verma

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तेरे कर्मों का प्रतिफल है

VIJAY KUMAR VERMA 1:41 AM
तेरे कर्मों का प्रतिफल है,  पंखों का बिछौना है । प्रकृति के समक्ष मानव,  तू आज भी बौना है।।  लालच में पूर्णता  की , क्या क्य...Read More
तेरे कर्मों का प्रतिफल है तेरे कर्मों का प्रतिफल है Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 1:41 AM Rating: 5

सॅभल कहाँ पाते।

VIJAY KUMAR VERMA 6:07 AM
बिखर ही जाना था, सॅभल कहाँ पाते। वो जिस तरह से बदला, बदल कहाँ पाते।। कुछ ऐसी बात थी जिसने, मुझे झुकने न दिया; जमीर बेंच के वैसे भी, ...Read More
सॅभल कहाँ पाते। सॅभल कहाँ पाते। Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 6:07 AM Rating: 5

उड़ जाना होता है

VIJAY KUMAR VERMA 9:19 AM
साथ परिन्दों का कब, तक? छुट जाना होता है। पंख खुले तो फिर इक दिन, उड़ जाना होता है।। खुशी के पल जो खुशबू, बनकर ,महके जीवन मे, उन्हीं प...Read More
उड़ जाना होता है उड़ जाना होता है Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 9:19 AM Rating: 5

गजल

VIJAY KUMAR VERMA 4:16 AM
काम की बातों, को टाला जा रहा है। सिर्फ वादों को,उछाला जा रहा है।। बिलबिलाते भूख से,कितने मगर, सिर्फ महलों को,निवाला जा रहा है। मुस्कर...Read More
गजल गजल Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 4:16 AM Rating: 5
VIJAY KUMAR VERMA 9:56 AM
स्वागत  Read More
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फिर से-51

VIJAY KUMAR VERMA 12:30 AM
तुम्हारी आँखों के फैसले पर, लगी हुई मन की आस फिर से। बदन नहाया हुआ अश्क से, मगर लबों पे है प्यास फिर से।। उलझन मन कु बढ़ती जाये, कभी हँ...Read More
फिर से-51 फिर से-51 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 12:30 AM Rating: 5

फिर से-50

VIJAY KUMAR VERMA 11:59 PM
नुकीले काँटों ने पहनी फिर से, भरोसे वाली लिबास फिर  से। कुछ तो अनहोनी होनी   है, बातों मे है मिठास फिर  से। कहीं झूम के सावन बरसे, याच...Read More
फिर से-50 फिर से-50 Reviewed by VIJAY KUMAR VERMA on 11:59 PM Rating: 5
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